तन्हां तन्हां ...

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मैं हूँ तन्हाँ – तन्हाँ
टूटा – टूटा – सा
पत्ता शाख का यहाँ
ए काश ! कि मैं
तेरे साथ होता वहाँ
मेरी गमे जुदाई
तू करता दूर
होता ना हालातों से
तू मजबूर
यूँ इश्क में
अश्कों का बहना
उस साफ़गोई का
क्या कहना !
ए खुदा ! मेरी रूह में
बसा बस तू है
सनम हरजाई !
तुझमें बसी मेरी रूह है
ज़र्रे ज़र्रे में मुहब्बत है !
हाँ मुहब्बत है !
बस तेरी ख़ुदाई से
हमें मुहब्बत है !!
…………अनिता जैन ‘ विपुला ‘

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Lecturer at college . Ph. D., NET, M. Phil. M. A. (Sanskrit , Hindi lit.)...
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