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तत्व-बोध और जागरण

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

कविता

September 29, 2017

”तत्व-बोध से जागरण”
???
क्या है ये सब ?
पूछे सबका रब,
एक नहीं,
असीमित है ,
बेहतर है जीवन कर्म,
जीवन के नहीं हैं ये कर्म,
लिया है,
मानव जन्म,
जो तू कर रहा कर्म,
नहीं है तेरा धर्म,
रख दे तू ताक पर,
छोड़ ऐसे कर्म,
हो जा सतर्क,
पहचान अपने तर्क,
तुझसे कौन कहलवा रहा,
उसी की कर वंदना,
सफल हो तेरा जन्म,
ताकि समर्पित हो
उसी को सभी कर्म,
फिर तू न जन्मा है,
न ही तेरा मरण,

डॉ महेन्द्र सिंह खालेटिया,

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Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !

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