कविता · Reading time: 1 minute

तड़पाती यादें

जब छोड़कर जाता है कोई
यादें क्यों छोड़ जाता है
रहता है जिस दिल में वो
तोड़कर उसको क्यों जाता है।।

कोई कह दो उसे ये कि तेरी इन
यादों का करूंगा क्या अब मैं
जो आती रही तेरी ये यादें इस कदर
पल पल, हर पल मरूंगा मैं।।

अच्छा यही होता यादें भी साथ
ले जाता, जो छोड़ गया है
जाने क्यों आज अचानक ही राह
अपनी जिंदगी की मोड़ गया है।।

आदत अपनी डालकर मुझको
यूं दूर जाकर अब सता रहा है
यादों में आकर मेरी, अब हर पल,
अपनी कमी का अहसास जता रहा है।।

जानते हो तुम,नहीं जी सकता,
तुम्हारे बिना मैं अब ये ज़िंदगी,
तुम्हारी यादें कब तक रोकेगी मुझे
छोड़ने से अब ये मेरी ज़िंदगी।।

जुदाई तेरी जीने नहीं देती मुझे
कैसी कश्मकश में डाला है मुझे
जब ख्याल आता है मरने का तो
यादें तेरी, मरने नहीं देती है मुझे।।

यादों के झरोखे से बाहर आकर
संभालो मुझे मेरी ज़िंदगी में आकार
बहुत तड़पा हूं मैं तेरी जुदाई में सनम
अपना बना लो फिर, जिंदगी में आकर।।

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