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तकदीर

डाॅ. बिपिन पाण्डेय

डाॅ. बिपिन पाण्डेय

कविता

February 11, 2018

तकदीर-
———–
चमचमाती मर्सिडीज में
मेम साहब की गोदी में
बैठे हुए डाॅगी को
गली के कुत्ते ने देखा-
जो पास में खड़े हुए
व्यक्ति के सामने दुम हिल रहा था,
गाड़ी के हार्न की आवाज़ से
उसकी तंद्रा टूटी।
जो देखा वह देखता ही रह गया
गुंथे आटे- सी कोमल काया वाली मेम साहब
उसे सहला रही हैं
वह मेम साहब का मुंह चाट रहा है
तभी लात मारकर पास खड़े व्यक्ति ने
उसे भगा दिया——
रास्ते का पत्थर
जिसे सब हिकारत से देखते हैं
उसकी उपयोगिता मात्र इतनी है
कि जब तब उसे कोई
कुत्ते भगाने के लिए उठा लेता है।
मंदिर में रखी मूर्ति जो प्रस्तर खंड से ही बनती है
उसे सब माथा झुकाते हैं।
कुछ लकड़ियाँ समिधा में प्रयुक्त होती हैं
कुछ रोटी बनाने के लिए
तो कुछ शरीर को
पंच महाभूतों में विलीन करने के लिए।
कुछ कागज़ों पर क ख ग लिखा जाता है
कुछ लिफाफे बनाने में प्रयुक्त होते हैं,
जिनमें मूँगफली रखी जाती हैं।
कुछ लोग सेवा करने के लिए पैदा होते हैं
कुछ सेवा करवाने के लिए
पता नहीं किस्मत कर्म से बनती है
या ये सब प्रारब्ध का खेल है
पर जो भी है,अनिर्वचनीय है।
डाॅ बिपिन पाण्डेय

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