कविता · Reading time: 1 minute

तकदीर में तुम नहीं

तकदीर में हमारे
तुम नहीं
फिर भी जिये जा रहे हैं
गम नहीं
तन्हाई का आलम इस कदर
पर बेफिक्र जिन्दगी
पिये जा रहें
अब बात ना कर मोहब्बत की
गमें शाम मयखाने में
गुजारे जा रहे
याद आये तो क्या
आँसुओं का समंदर
छुपाये जा रहे हैं
तकदीर में हमारे
तुम नहीं…

~रश्मि

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