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डाॅ०श्री रंजन सुरिदेव जी को नमन

करता हूँ अर्पण स्नेहसुमन।
करके मन से स्मरण।।
शोक संलिप्त है आज पुन:साहित्य लोक।
देखकर यह महाप्रयाण को परलोक।।
आज हो गये जो फिर से विलोपित।
काल ने कर लिया जो एक ओर ज्ञानतारा ग्रसित ।।

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Bharat Bhushan Pathak
Bharat Bhushan Pathak
DUMKA
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कविताएं मेरी प्रेरणा हैं साथ ही मैं इन्टरनेशनल स्कूल अाॅफ दुमका ,शाखा -_सरैयाहाट में अध्यापन...