डमरू घनाक्षरी

***डमरू घनाक्षरी****
(*इसमें सभी वर्ण मात्रा रहित होते है*)
सकल जगत तव नमन करत रब।
भगवन न नजर कर इधर उधर।।
मन नगर नगर चल डगर डगर,
जब तक न पकड़ तव कर नटवर ।
तज कर सब मद कर चरण भजन,
कर करम सहज कर सफल उमर।
हरत अघनहर तव सब अघ पर।
जतन सकल कर मन चरनन धर।
******* मधु गौतम

Like Comment 0
Views 156

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing