कविता · Reading time: 1 minute

ठहरता कुछ भी नहीं

सुख है तो दुख भी है
गम है तो खुशियां हैं
परेशानियां है तो आसानियां हैं
समस्या है तो हल भी है
जीवन है तो सब है
हंसिये हंसाइऐ
जीवन हर पल है
सुख-दुख सब निकल जाएगा
जीवन तो चलता है चलता रहेगा
जीवन चक्र है सब आता जाता रहेगा
ठहरिए नहीं चलते रहिए
मुस्कुराइए गाइए
ठहरता कुछ भी नहीं

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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