कविता · Reading time: 1 minute

ठण्ड का असर

हवा में ठण्ड का असर दिख रहा है
चुप-चुप सा यह शहर दिख रहा है
बहता था कल-कल नदिया के जैसे
जम गया सा वो ही मगर दिख रहा है
चाय,कॉफी की चुस्की,हलवा,पकौड़े
संग छुट्टी के यह दिवस बीत रहा है
निकलेंगे कल कैसे रजाई को त्यागे,
यह चिंतन मन को मगर टीस रहा है

(सभी कर्मचारियों को समर्पित ???)
✍हेमा तिवारी भट्ट✍

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