.
Skip to content

ठगें सभी रिश्ते उसे

Rita Yadav

Rita Yadav

दोहे

September 6, 2017

ठगें सभी रिश्ते उसे, ठगे उसे परिवार l
आज अकेले रो पड़ी, होकर वो लाचार ll

‘रीता’ वहांँ न जाइए, मिले जहांँ अपमान l
हर धन से होता बड़ा, है अपना सम्मान ll

बातें उनकी प्रिय लगें, उर में उनका वास l
कह दूंँ कैसे हे सखी, यह सुंदर अहसास ll

अंधभक्त बनना नहीं,कभी किसी का यार l
चल पड़ता इससे किसी, बाबा का व्यापार ll
कपटी, दंभी, लालची ,अपना करें बखान l
बातों से इनकी लगे, ये है बड़े महान ll

जिस घर में पूजें सभी, गौरी – पुत्र गणेश l
वास वहांँ आकर करें,ब्रह्मा विष्णु महेश ll

रीता यादव

Author
Rita Yadav
Recommended Posts
II दर्द मुफलिसी का II
ना कोई दोस्त अपना, न पहचान कोई l जिस पर बीते वह ही जाने ,दर्द मुफलिसी का ll मतलबी यह दुनिया, मतलब के सारे रिश्तेl... Read more
II  नसीबा हि दुश्मन.....II
नसीबा हि दुश्मन हमारा हुआ है l जहां डूबी कश्ती किनारा हुआ है ll मेरी मुफलिसी छोड़ जाती नहीं हैl मेरा घर हि उसका ठिकाना... Read more
II....हो सके तो टाला कर  II
जन्नत का रास्ता भी ,यही से निकलेगा l अंधेरी राह में दीपक, जलाकर तू उजाला कर ll अपने लिए तो आज तक ,एक उम्र जी... Read more
झूठ बिके झटपट ?
Rita Yadav दोहे Jul 20, 2017
पथ पर चलना सत्य के, कभी नहीं आसान l झूठ बिके झटपट यहां, सच की बंद दुकान ll _____________________ रखो नहीं दिल में कभी, मित्र... Read more