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” ——————– ठगते हो तुम ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गज़ल/गीतिका

December 7, 2017

बड़े लुभावन लगते हो तुम !
पल पल लगता ठगते हो तुम !!

हंसने के अंदाज़ निराले ,
आंखों में जो बसते हो तुम !!

मतवारे नयनों में जादू ,
सम्मोहित कर हंसते हो तुम !!

मुस्कानें तो धारदार हैं ,
इक गुलाब से लगते हो तुम !!

बिन बोले ही सब कह जाते ,
भोले भोले बनते हो तुम !!

मूक निमंत्रण हमें दे दिया ,
जैसे महक लहरते हो तुम !!

डगर प्यार की, समय प्यार का ,
साक्षी बने ठहरते हो तुम !!

रूठ गये तो कठिन मनाना ,
खुद को खुदा समझते हो तुम !!

बृज व्यास

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

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