मुक्तक · Reading time: 1 minute

छल फरेब

टूटता साथ अब बनाना है !
दूरियाँ आज सब मिटाना है !
हो न अब छल फरेब आपस में !
आज विश्वास ये जमाना है !!

आलोक मित्तल उदित
रायपुर

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