झूला झूलें रे किशोरी

*झूला झूलें रे किशोरी*
०००००००००००००००
डारन पै झूला डार,
किशोरी झूलें हरे-हरे, किशोरी झूलें बागन में ।
डारन पै झूला डार ।।

सजी-धजी सब सखियाँ मिल कै, ललिता के सँग आईं ,
चंदन की महकै रे पटली, रेशम डोरी लाईं ,
किशोरी झूलें हरे-हरे ,किशोरी झूलें बागन में ।
डारन पै झूला डार ।।१

चल कै आई संग बाग में श्री वृषभानु किशोरी ,
अमवा की डारी पै डारी ,सखियन नै मिल डोरी ,
किशोरी झूलें हरे-हरे, किशोरी झूलें बागन में ।
डारन पै झूला डार ।।२

झूला पै चढ़ राधा जी नें ऊँची पेंग बढ़ाई ,
झोटा देय विसाखा प्यारी, ललिता लख मुसकाई ,
किशोरी झूलें हरे-हरे, किशोरी झूलें बागन में ।
डारन पै झूला डार ।।३

सावन के फिर गीत सुहाने ,मिल सखियन ने गाये ,
साँवरिया उत ग्वालन के संग, घूमत-घूमत आये,
किशोरी झूलें हरे -हरे , किशोरी झूलें बागन में ।
डारन पै झूला डार ।।४

डार गले गलेबहियाँ झूलें , सँग में कृष्ण मुरारी ,
छेड़ी तान मुरलिया की फिर, साँवरिया ने प्यारी ,
किशोरी झूलें हरे-हरे, किशोरी झूलें बागन में ।
डारन पै झूला डार ।।५

नन्हीं-नन्हीं परें फुहारें, सरसावै पुरवैया ,
कोयल कूकै मोरा नाचैं ,चहकै रे गौरैया ,
किशोरी झूलें हरे-हरे, किशोरी झूलें बागन में ।
डारन पै झूला डार ।।६

अम्बर ते बरसै रे मेहा, उर में नेहा बरसै ,
छवि के दरशन करकै भोरे, भगतन कौ मन सरसै ,
किशोरी झूलें हरे-हरे, किशोरी झूलें बागन में ।
डारन पै झूला डार ।।७

-महेश जैन ‘ज्योति’
***

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 2

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share