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Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

गीत

September 25, 2017

झूम झूम झूम बरसती ये रात
पिया के दरस को तरसती ये रात।

बरखा बैरन बनी हमारी
छम छम छम बरसाए फुहारी
बदरा संग गरजती ये रात
झूम झूम झूम बरसती ये रात।

जियरा मेरा जल जल जाए
याद बिछड़े मितवा की जो आए
हाय अगन सी दहकती ये रात
झूम झूम झूम बरसती ये रात।

—-रंजना माथुर दिनांक 24/09/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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