.
Skip to content

झूठ बिके झटपट ?

Rita Yadav

Rita Yadav

दोहे

July 20, 2017

पथ पर चलना सत्य के, कभी नहीं आसान l
झूठ बिके झटपट यहां, सच की बंद दुकान ll
_____________________

रखो नहीं दिल में कभी, मित्र किसी की बात l
हर रिश्ते की एक दिन, खुलती है औकात ll
_____________________
मैं मैं करते हैं सदा, गिरा नयन का नीर l
अपनों की समझे नहीं, अब तो अपने पीर l
_____________________

मिट्टी के हम सब बने,मिट्टी ही पहचान l
चार दिनों का खेल यह, खेल रहा इंसान ll
_____________________

Author
Rita Yadav
Recommended Posts
सारे फरेब
बिसात है बिछी ,वह खेल रहा है l सारे फरेब दिल , झेल रहा है ll हम प्यादे वह ,बजीर बादशाह l जीत किसकी ,कोई... Read more
II....तुम्हारे बाद ये मौसम...II
न जाने दूंगा अभी तुमको बारिशो में मैं l तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा ll नहीं उसे कभी होता गुमान अपने पर l उठा... Read more
मैं घरौंदा रेत का
सागर सा तू विशाल, मैं घरौंदा रेत का l निश्चित है परिणाम, इस जीवन के खेल का ll उद्देश्य ढूंढता हूं, दो लहरों के दरमियां... Read more
II  यादें सता रही है  II
यादें सता रही है गुजरे हुए दिनों की l जो साथ में गुजारे उन कीमती पलों की ll क्या बात मैं बताऊं कहती जो ए... Read more