दोहे · Reading time: 1 minute

झूठ (दोहावली)

झूठ कभी ना जीतता, कर लो जतन हजार।
भले देर से ही सही, जीते सच हर बार।।
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झूठ सदा भारी पड़ा, बढ़े अधर्मी पाप।
सत्य तभी निर्बल पड़ा, हुए न दृढ़ हम आप।।
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सत्य सदा जो बोलता, रखना पड़े न याद।
एक झूठ करता सदा, सौ झूठी फरियाद।।
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झूठ घटाती मुश्किलें, भ्रम तू ये ना पाल।
घर में ही क्या कम पलें, कुछ जी के जंजाल।।
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झूठे की रहती सदा, रातों नींद हराम।
सच्चा सोता चैन से, कर के सारे काम।।

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Author
1970 से साहित्‍य सेवा में संलग्‍न। अब तक 14 संकलन, 6 कृतियाँँ (नाटक, काव्‍य, लघुकथा, गीत संग्रह, नवगीत संग्रह ), 6 सम्पादित पुस्तकें। 1993 से अबतक 6000 से अधिक हिन्‍दी…
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