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झूठ तुमने दिल से कहा होता

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

गज़ल/गीतिका

August 24, 2017

तुम्हारी बातों से भी ये दिल खुश होता
जो कही झूठ तुमने दिल से कहा होता

हम शायर तो वैसे मोहबत के मरीज है
दिल से दवा दी होती तो असर होता

तुम्हारा यूँ बेवजह झुंझला के पड़ जाना
मेरी ज़िंदगी मे मौत का आना सा होता

काश तुम ये बेबफाई हमसे कर देती
सच कहूँ उस पल पथ्थरों पर कहर होता

तुम तो केवल आती और मुस्कुरा जाती
ऋषभ की ज़िंदगी का वो आखिर पल होता

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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