23.7k Members 50k Posts

झूठी तारीफ मैं नही करता

बाग में खिलती रात रानी है
जिसके दम से फिजां सुहानी है

भूख लगती नही अगर तुमको
ये तो उल्फ़त की ही निशानी है

हसरतें कब की जल चुकीं मेरी
खाक़ लेकर के अब उड़ानी है

पत्थरों पे शज़र मुहब्बत के
आज हम सब को ही उगानी है

झूठी तारीफ मैं नहीं करता
साफ कहना ही सच बयानी है

दिल लगाना आम है लेकिन
प्यार कहते जिसे रुहानी है

है जहाँ पर अंधेरा नफरत का
प्यार की एक लौ जलानी है

इश्क़ तो रब का फक़्त है सच्चा
वर्ना दुनिया को समझो फानी है

माँ का आदर न कम करो “प्रीतम”
वो तो करती निगेहबानी है

335 Views
प्रीतम श्रावस्तवी
प्रीतम श्रावस्तवी
भिनगा
377 Posts · 7k Views
मैं रामस्वरूप उपनाम प्रीतम श्रावस्तवी S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत...