झूटे से उसका नाम हवाले में आ गया

झूटे से उसका नाम हवाले में आ गया
कानून के वो आज शिकंजे में आ गया

छोटा सा एक बाल निवाले में आ गया
खाँसी के मैं अजीब से फन्दे में आ गया

आँखों में सिर्फ़ देख के लूटा है मालोज़र
अब क्या बताऊँ कैसे मैं झांसे में आ गया

किस्मत कहूँ के ये है ख़राबी दिमाग़ की
तेरह कभी तो तीन के फेरे में आ गया

बाहर निकाल पाँव को देखा कि घाव है
काँटा कोई महीन सा जूते में आ गया

वो फ़ायदा तो ले के गया छोड़कर दुकाँ
नुक़सान जो हुआ मेरे हिस्से में आ गया

पंछी वो भूख से ही परेशान था बहुत
दाने को सिर्फ़ देख के पिंजरे में आ गया

तरज़ीह दे रहा है तरक़्क़ी ए शह् र को
नादान गाँव छोड़ के सस्ते में आ गया

‘आनन्द’ फिर उठाए मुहब्बत की पालकी
दुनिया के सामने है उजाले में आ गया

– डॉ आनन्द किशोर

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