मुक्तक · Reading time: 1 minute

झुका हुआ शख़्स

कलम लाएंगी एक रोज़ बदलाव की सूरत!
लफ़्ज़ो से खतरनाक शरारा नहीं होता हैं!

तहजीब अदब और सलीका भी तो कुछ है!
झुका हुआ हर शख़्स बेचारा नहीं होता हैं!
✒Anoop S.

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