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*झील*

Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir

मुक्तक

August 9, 2016

झील, नदी,झरने,तालाब ईश्वर का उपहार है
मानव क्यों ये’ भूल गया अब इनसे ही संसार है
इनके बिन सब कुछ रीता अंतस में है पीर जगे
इनको सदा सुवासित रखना जीवन का आ’धार है
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Author
Dharmender Arora Musafir
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
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