झींगुर,झिं-झि ध्वनी करता!

●झींगुर
झिं-झि
ध्वनी करता।

●छोटे से
नाजुक से
चौड़े चोड़ें
भूरे से
दो पंखों
से उड़ता
कुलाचे भरता।

●कभी बैठता
माथे पर
कभी
हथेली पर
कभी कानों
के पास आकर
गुपचुप
झिंझीं कर
बाते करता।

●जब ये
धीमे से
मंद मंद
अपना
आरचेस्ट्रा
बजाता,
लगता
जैसे
स्वर -ताल
का ज्ञानी
कुशल
कलावंत
सधे हुए
हाथों से
वायलिन के
स्वर
झंकृत
करता।

●हे’ दीप’
तुम अपने
प्रकाश पर
क्यों
इतराते हो,
तुम क्या
हो इसके
सामने
वो खाता
अन्य कीट
जैव विविधता
संतुलित करता,
प्रकृति का
छोटा सा
हिस्सा
झींगुर
तुम्हे अपने
सामने कितना
असमर्थ , अक्षम
साबित करता।

-जारी
-©कुलदीप मिश्रा

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