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झरने

Rita Singh

Rita Singh

कविता

July 11, 2017

कर संघर्ष पाषाणों से
मधुर संगीत सुनाते झरने
कल – कल कल – कल गीत सुनाते
आगे बढ़ते जाते झरने ।

कभी न रुकते कभी न थकते
हिम्मत हैं बरसाते झरने
सूनी सूनी गिरि राहों में
मंगल भाव जगाते झरने ।

मन से निर्मल तन से द्रवित
पत्थर पर प्रेम लुटाते झरने
कर स्पर्श शिलाखंडों को
जलमय उन्हें बनाते झरने ।

डॉ रीता
एफ 11 , फेज़ 6
आया नगर , नई दिल्ली
110047

Author
Rita Singh
नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन... Read more
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