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झरना

Laxman Singh

Laxman Singh

गज़ल/गीतिका

February 13, 2018

झरने पर ना जाने क्या लिखकर डाला
पढ़ ना पाया जाने क्या लिखकर डाला

पहाड़ों से यह क्या धरा पर उतर आया
शरीर से हृदय तक मदमस्त कर डाला

बेरंग सा है पर सप्तरंग समेटे बह रहा
पल्लवित रोम रोम में अमृत भर डाला

हर क्षण हर कण गिरि पर थाप दे रहा
संगीत रानी वीणा सा सुरमय कर डाला

फुव्वारों का आभा मंडल विस्तार दे रहा
छिटकी थकान शरीर में जोश भर डाला

ऊपर से अनवरत नीचे स्थान बना रहा
नदी नालों में जीवन रस को भर डाला

लक्ष्मण सिंह
जयपुर (राजस्थान)

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Author
Laxman Singh
From: जयपुर
1978 से प्रिंट मीडिया से जुड़ा हूं। अभी बुलेटिन टूडे में कार्यरत हूं
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