Skip to content

झगडा,मन्दिर मस्जिद का

Jaikrishan Uniyal

Jaikrishan Uniyal

कविता

February 12, 2018

आज कल है फिर,यह हल चल,
मस्जिद है बाबरी,या फिर जन बल ।
जन्म राम ने लिया जहाँ,
था बना मन्दिर वहाँ ❓
कौन गवाह है अब यहाँ,
खसरा खतौनी है कहाँ ।
राम तो बसते हैं हर जन में,
हर भारत वासी के मन में।
फिर मन्दिर ➖मस्जिद का झगडा क्यों,
बोटों का यह रगडा क्यों।
मनुष्य हो तो मनुष्यता का काम करो,
मानवता पर स्वयं को न्योछावर कर दो,
दीन दुखियों का जीवन,खुशियों से भर दो।
तब हर भारत वासी,तुम्हे मानवता का सच्चा दूत कहेगा,
मर कर भी नाम तुम्हारा अमर रहेगा ।
दोनो समुदाय के लोगों से अनुरोध है कि अब इसे न्यायालय के निर्णय पर छोड दें,और उस निर्णय को शालीनता के साथ स्वीकार करने का हौसला रखें।सादर अनुरोध है। जयकृष्ण उनियाल

Share this:
Author
Jaikrishan Uniyal
From: Saklana Tehri Garhwal
सामाजिक कार्यकर्ता,पुर्व ॻाम प्रधान
Recommended for you