कविता · Reading time: 2 minutes

जाता क्या तू चायना!

ऐ-सुन !
सुना. !
जाता क्या तू चायना!
क्या करूँ जाकर के चायना!
खेलेंगे,,नौकरी करेंगे,ब्यापार करेंगे,! और लायेंगें,वहाँ से कोरोना!

ऐ-सुन!
सुना !
जाता क्या तू चायना!
क्या करूँ,मैं जाकर चायना!
ब्यापार है,आयात का कारोबार है, लें आएँगे वहाँ से कोरोना!

ऐ-सुन !
सुना !
जाता क्या तू चायना!
क्या करूँ मैं जाकर चायना!
खुशियाँ से जी रहे भारत को , करेंगे,बेहाल,लाकर के कोरोना!

ऐ-सुन!
सुना!
जाता क्या तू चायना!
क्या करूँ मैं जाकर चायना!
स्वास्थ्य-सुविधाओं को करने बदहाल,लें आना वहाँ से कोरोना!

ऐ-सुन!
सुना!
जाता क्या तू चायना!
क्या करूँ मैं जाकर चायना !
अर्थ व्यवस्था को करने को चकनाचूर,और लाने को कोरोना!

ऐ-सुन!
सुना. !
जाता क्या तू चायना !
क्या करूँ मैं जाकर चायना !
अविश्वास-असहमति-और मासूमों पर बरपाने को कहर,
घरों में ही कैद करने को मजबूर,लें आएँ वहाँ से कोरोना!

सुन !
अब तु सुन !
क्या सुन!
चल सुना !
अब ना जाएंगे हम चायना!
जहाँ-दिल में है मैल,
चाहत है श्रेष्ठता की,
बनना चाहता है जो आर्थिक-राजनयिक सिरमौर!
क्यों जाएँ हम वहाँ!
जहाँ,से मिलता है मानव जाति को तिरस्कार,
और मिलती है असमय की मौत!
नहीं जाना है मुझे !
ऐसे किसी देश!
अपने ही लोगों से करता है छल!
अपने ही लोगों पर है जिसका अनैतिक शासन का बल!
वह कहाँ किसी को समझ पाता है निर्मल!
नहीं जाना चाहिए !कहता हूँ सबसे,
अपने ही देश को बनाए सबल !
तो चल कहते हैं सबसे,क्यों रहते हो.छलावें में!
सस्ती वस्तुओं के दिखावे में!
मेक इन इंडिया को करें साकार!
अपने ही लोगों पर जता के भरोसा!
करें नित-नित नए आविष्कार!
लगाएँ उद्योग,बढाएं व्यापार!
हर हाथ को काम मिले, रहे ना कोई बेरोजगार!
चायना नही है मित्र अपना, करें उसकी वस्तुओं का बहिष्कार!
मिल कर करें हम इस पर विचार।।

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सामाजिक कार्यकर्ता, एवं पूर्व ॻाम प्रधान ग्राम पंचायत भरवाकाटल,सकलाना,जौनपुर,टिहरी गढ़वाल,उत्तराखंड।
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