कविता · Reading time: 1 minute

ज्ञान की अलख

अज्ञान के अंधकार को भगाने को
ज्ञान की अलख घर घर जगाने को
निकल पड़ी हूँ मैं लेकर अटल इरादा

कुछ लोग खूब आलोचना करेंगे मेरी
कुछ लोग बहुत सराहना करेंगे मेरी
शुरुआत में साथ नहीं देंगे लोग ज्यादा

ये डगर है जोखिम भरी मुझे पता है
लोग रचेंगे साजिश गहरी मुझे पता है
पर मंजिल पर पहुँचना है पार करके बाधा

अपनी मंजिल की ओर बढ़ते जाना है
हर हाल में लोगों को जागरूक बनाना है
किया है मैंने अपने आप से ये वादा

वक़्त को अपने साँचे में ढ़ालना चाहती हूँ
ज्ञान को अपने आँगन में पालना चाहती हूँ
व्यर्थ की सोच में खो दिया जीवन आधा

सच करके दिखाना है साक्षर भारत का सपना
दीये की तरह जला देना है अब जीवन अपना
दुनिया गायेगी “सुलक्षणा” तेरी अमर गाथा

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