Skip to content

ज्ञान का भ्रम

ईश्वर दयाल गोस्वामी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

लेख

August 12, 2017

जो अज्ञानी व्यक्ति है वह ज्ञानवान व्यक्ति का शत्रु नहीं हो सकता बल्कि जो ज्ञान होने का दिखावा करता है कि मै ज्ञानी हूँ उसका यह भ्रम ही उसके ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु है क्योंकि इस संसार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो संसार के ज्ञान रुपी सागर को अपने मन मस्तिष्क में पूर्णतः समाहित कर ले जबकि इस सत्य को नकारते हुए कुछ लोग अपने आप को पूर्ण ज्ञानी मानते हैं और यह भ्रम उनमें इस तरह व्याप्त हो जाता है कि वे जीवन की हर नकारात्मकता को ही सत्य की कसौटी पर कसने हर असफल प्रयास करते रहते हैं ।
कहने का आशय यह है कि ऐंसे लोग केवल हवाई किले बनाते रहते हैं , चलते हुए स्थिर हो जाते हैं और अचल होते हुए यात्राएँ करते हैं यानि अनवरत आशंकाओं मेंं जीना इनकी आदत और नियति बन जाती है ।
ये लोग अपने आप को ही अंतिम सत्य मानकर चलते हैं इस कारण इनका स्वभाव निरंतर अहंकार की वृद्धि करता जाता है और धीरे धीरे समाज से कटते चले जाते हैं परंतु ये अपने भीतर कभी नहीं झांकते उल्टे समाज को ही दोषी ठहराते हैं ।
ऐंसे लोगों मेंं सबसे बड़ा उदाहरण हमारे सामने रावण है जो स्वयं ही अपने आप को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सबसे बड़ा ज्ञानी मानता था और यह भ्रम उसे समग्र जीवन रहा फलस्वरूप इस भ्रांत धारणा के कारण उसके जीवन में छद्म अहंकार ने प्रवेश कर अपना उत्तरोत्तर विकास किया और यह अहंकार ही उसके पतन एवं विनाश का कारण बना ।
इसलिए वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का यह कथन कि ” ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु उसका अज्ञान नहीं, बल्कि ज्ञान होने का भ्रम है ”
अपने आप में सही एवं प्रमाणित कथन है ।

Author
ईश्वर दयाल गोस्वामी
-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार... Read more
Recommended Posts
मुझे श्रेष्ठ होने का भ्रम था।
मुझे श्रेष्ठ होने का भ्रम था ज्ञान कही कुछ कम था। अपना देखा बेहतर माना नही किया तुलना लोगो से। देखा जब संसार घूमकर पाया... Read more
राष्ट्र अवनतिरूपमय भ्रम पकड, पंगा हो गया
प्रेम-पथ पर चला उस का ज्ञान गंगा हो गया| बहा उल्टा जगत-तम का पूत चंगा हो गया| ज्ञानी बन, यदि शांत तुम, नितांत फूटे ढोल-सम|... Read more
"पुस्तक" संस्कृति संज्ञान शिक्षा सोपान दे सम्मान विज्ञान ज्ञान मान सुज्ञान शुचि ज्ञान शब्द जहान संस्कृति ज्ञान ********** शिक्षण आधार जीवन सार शब्दागार आधार मित्र... Read more
ज्ञान ?
सदियों से भटक रहा, ज्ञान की खोज में इंसान। पर मिलता कहाँ संसार में, चैतन्य स्फुरण ही पहचान। वेद क़ो ही कहते ज्ञान, ज्ञान का... Read more