गीत · Reading time: 1 minute

जो सरहद पे जाए …

हवाओं में महके कहानी उसी की |
जो सरहद पे जाए जवानी उसी की |

सभी से जो बिछड़े सो घर बार छोड़ा,
वतन की जरुरत पे संसार छोड़ा,
थी सरहद से लौटी निशानी उसी की,
जो सरहद पे जाए जवानी उसी की |

दिलों में बसे हैं वतन के वे जाये,
नसीबी है अपनी फतेह ले के आये,
उफनती जो नदिया रवानी उसी की,
जो सरहद पे जाए जवानी उसी की |

ये अपना अमन चैन कायम है उनसे,
हैं सच्चे वही सब निगेहबान अपने,
हुई सारी दुनिया दीवानी उसी की,
जो सरहद पे जाए जवानी उसी की |

हवाओं में महके कहानी उसी की |
जो सरहद पे जाए जवानी उसी की |

–इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

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30 जून 1965 में उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के “सरैया-कायस्थान” गाँव में जन्मे कवि अम्बरीष श्रीवास्तव एक प्रख्यात वास्तुशिल्प अभियंता एवं मूल्यांकक होने के साथ राष्ट्रवादी विचारधारा के कवि…
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