गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

जो मै नहीं कहता मेरे अश्यार कहते हैं

चन्द अल्फाज मेरे दिल के अफकार कहते हैं
जो मैं नहीं कहता मेरे अश्यार कहते हैं

कोई भी बज्म हो महफिल हो दिल नहीं लगता
बस खामोश आँखों से तमाशों का दीदार करते हैं

हुए वर्षों न हम उनसे इजहार-ए-तमन्ना कर पाये
करने को लाख उनसे हम बातें हजार करते हैं

खुदा साहिद है धोखे से भी हमने मय नहीं पी है
जाने किस अदा पे सब बादाख्वार कहते हैं
M.T”Ayen”

2 Likes · 6 Comments · 128 Views
Like
48 Posts · 4.9k Views
You may also like:
Loading...