जो मिला उसे खुशी से जीना सीखो.

ना करो गिला”ना हो सिकवा’ सिकायत का रूख ना हो खुदा से;
क्या मांगते हो उससे खुश रहो उसमे जो मिल गया इत्तफ़ाक से…
मागते हो उससे दौलत हो बेसुमार
उन गरीबो की सोचो जो सड़क पर बेघर पडे है हजार;
क्यों मागते हो पैरो के लिये अच्छी चप्पलो की कतार
उनसे तो खुशनशीब हो’ जिन्हे पैर ही नही दिये भगवान
;अब जरा खुद पर भी कर लो एतबार
अपने चहरे से बेयमानी का मुखौटा फेको उतार
तुम्हारे सभी कारनामो का है उपर वाला राजदार..;मत कहो ईश्वर ने किया गलत तुम्हारे साथ
उसने तो जीवन दिया है..अनमोल उपहार जो है तुम्हारे पास;
इस अनमोल उपहार से.करो कुछ चमत्कार खुदा भी फक्र से कहे इसे तो हमने बनाया है यार……………$.

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