जो पिता से प्यार करतीं वो हमारी वेटियॉ: जितेंद्र कमल आनंद ( पो १२९)

गीत
——- जो पिता से प्यार करतीं, वो हमारी वेटियॉ हैं ।

सूर्यको जो अर्घ्य देतीं, ज़िन्दगी का अर्थ देतीं ।
हर्ष देती खेलकर भी, जो व्यथाएँ झेल कर भी ।
किंतु साहस है न छोड़ा , वे हमारी पुत्रियॉ हैं।
जो पिता से प्यार करतीं ,वो हमारी वेटियॉ हैं ।।

क्या ज्योत्सना- आराधना , ज्योतित पूजा – उपासना।
पुत्रियों को जो सुलातीं, गा रहीं वो लोरियॉ हैं ,
आयुष्मती सब हों सुखी, ये हमारी पुत्रियॉ हैं ।
जो पिता से प्यार करतीं वो हमारी वेटियॉ हैं ।।

हम इन्हें चंचल न समझें, हम इन्हें निर्बल न समझें ।
कामुकों पर, लोफरों पर टूटतीं जो बिजलियॉ हैं ,
किंतु साहस है न छोड़ा, वो हमारी वेटियॉ हैं ।
जो पिता से प्यार करतीं, वो हमारी वेटियॉ हैं ।।
—- जितेंद्रकमलआनंद
१-११-१६ सॉई विहार कालोनी, रामपुर( उ प्र )

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