जो दहन होलिका का हुआ है तो क्यों?

जो दहन होलिका का हुआ है तो क्यों?
मन नहीं मिलते हैं, दूरियाँ बढ रहीं |

रक्षदल रूप का जो भी आकाश है |
वह सदा ही अविकसित है, औ त्रास है |
हिंसा औ क्रोध सह लोक का ह्रास है |
बोधी उर, प्रीति तज,छल रहा आज त्यों |
जो दहन होलिका का हुआ है तो क्यों?

सुन हिरण्याकशिपु रूप मद नहिं है सच |
स्वर्णमृग-मोहहित मन न माया में नच |
ईश-पथ की कहानी है जीवन कवच |
फिर हृदय विश्व मैला, न ढोएगा यों |
जो दहन होलिका का हुआ है तो क्यों ?

जागो “नायक” पकड़ आत्मारूपी ध्वज |
तेरा जी पिक-सदृश अति मृदुल, दिव्य द्विज |
बिना चिंतन, मनुज है अहंकारी अज |
प्रीति तज, चित् भी जगमय पतितराज त्यों |
जो दहन होलिका का हुआ है तो क्यों?
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बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रोंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

-“क्रौंच सुऋषि आलोक” कृति की रचना
-पेज संख्या 36 से
-“क्रौंच सुऋषि आलोक” कृति प्रकाशित होने का वर्ष -2016
आई एस बी एन :978-93-82340-39-3
प्रकाशक-जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली
रचनाकार-बृजेश कुमार नायक, सुभाष नगर, कोंच ,जिला-जालौन,उ प्र,285205
व्हाट्सआप-9956928367
सम्पर्क सूत्र -9455423376

11-05-2017

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