जो छुपी थी बात उसका अब असर होने को है(तरही गजल)

जो छुपी थी बात उसका अब असर होने को है
आज उसका ही तो चर्चा दर ब दर होने को है।

देख लेंगे जो भी होगा हाल इसके बाद में
जिंदगी का जाम देखो मय से तर होने को है।

आसरा देता रहा जो सबको अपनी छाँव में
लग रहा अब दूर उससे उसका घर होने को है।

बात हमसे वो नहीं करते सही से आज कल
*ऐसा लगता है कि किस्सा मुख्तसर होने को है।*

हौंसलों औ मिहनतों से अब अमल होता रहे
वर्ना मुश्किल जिंदगी की हर डगर होने को है।

बाँटने से बढ़ ये जाती ऐसी दौलत है सही
जोड़ कर रख ली मुहब्बत बे असर होने को है

फैसला उनको सुनाना हम पे भारी यूँ पड़ा
अब खिलाफत उनकी हमसे उम्र भर होने को है।

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 21

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share