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जो किये थे कसूर

Raj Vig

Raj Vig

कविता

June 24, 2017

अपमान किया है उसने किसी का
बेआबरू कर दिखाया है गरूर
दी है सजा उसने किसी को
जो था बिल्कुल बेकसूर ।

मिलेगा उसे इसका दण्ड
रोयेगा इक दिन हो के मजबूर
बचा नही है यहां पर कोई
पायेगा इक दिन जो किया था जरूर ।

आयेगा इक दिन वो भी राह पर
ढूंढेगा हर जगह कहां मिलता है सरूर
उतर जायेगा उसके सर से भी
अपने बड़े होने का फतूर ।

इक दिन उसका भी नशा उतरेगा
खाली हाथ गया है हर कोई हजूर
हाथ जोड़ कर प्रार्थना कर लेगा
बच जायेगा शायद उनसे जो किये थे कसूर ।।

राज विग

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Author
Raj Vig

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