जो किये तुमने शरारत कौन जाने!

जो किये तुमने शरारत कौन जानें।
इश्क़ में जो है बगावत कौन जाने।

तुम कभी नाराज ना होना किसी से,
सामने क्यों है पड़ा ख़त कौन जाने।

थाम तो ले हाँथ मेरा आज कोई,
बेबसी की वो हकीकत कौन जाने।

आसरा अब मैं करूँ किसका बता दे,
है कहाँ रब की अदालत कौन जाने।

चैन से ही कट रही थी जिंदगी जो,
अब सजा है या मुहब्बत कौन जाने।

शर्म से खिलता गुलाबी चेहरा है,
और उसकी वो नज़ाकत कौन जाने।

देखते ही रह गए उसको सभी यूँ,
है किसी की वो अमानत कौन जाने।

अब बचे कैसे शुभम् नजरों से उसकी,
कैद की क्या है जमानत कौन जाने।

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