जैसे कुछ हुआ ही नहीं

लम्हा लम्हा बदलती ज़िंदगी में
कितने बदल गए हम,
पर महसूस यूँ है होता,
जैसे कुछ हुआ ही नहीं,
बचपन की ज़िद्द समझौते में बदली,
समझ इतनी परिपक्व हुई,
अल्हड़पन अदब में बदला,
पर महसूस यूँ है होता,
जैसे कुछ हुआ ही नहीं,
खिलखिलाहट मुस्कान में बदली,
ऊँची एड़ी समतल जूती में बदली,
खुले बाल जूड़े में बदल गए,
सबके खाने पर भूख मिटगी,
पर महसूस यूँ है होता,
जैसे कुछ हुआ ही नहीं
खुद का सम्पूर्ण अस्तित्व बदल गया,
मैं से हम सर्वोपरि हो गया,
पर महसूस यूँ है होता,
जैसे कुछ हुआ ही नहीं

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