Skip to content

जैसे काँटा कोई चुभा सा है

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

गज़ल/गीतिका

September 18, 2017

आज की हासिल
ग़ज़ल
———-
2122 1212 22/112
????????
साथ है वो मगर जुदा सा है
राज़ दिल में कोई छुपा सा है
????????

????????
जब से देखी तुम्हारी ये आँखें
जैसे छाया कोई नशा सा है
????????

????????
देख रखना सँभाल कर इसको
दिल मेरा .एक आइना सा है
?????????

?????????
अब न रखना तू कोई भी मरहम
दर्दे-दिल ही मेरा दवा सा है
?????????

?????????
अब्र में चाँदनी छुपी बैठी
चाँद उसपे फिदा-फिदा सा है
?????????

?????????
कैसे रौशन हो घर ग़रीबों का
मुद्दतों से दिया बुझा सा है
?????????

?????????
आप आए तो लग रहा मुझको
फूल सहरा में फिर खिला सा है
?????????

?????????
आह निकली हमारे इस दिल से
जैसे काँटा कोई चुभा सा है

गिरह
?????????

?????????
जो कभी एक थे तो फिर “प्रीतम”
दरमियां क्यूँ ये फासला सा है
?????????
प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
17/09/2017
?????????
?????????

Share this:
Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more
Recommended for you