जैनो का कड़वा सच

बताओ कोई भी अजैन व्यक्ति महावीर जयंती, दशलक्षण पर्व, या कोई भी जैन त्यौहार मनाता या आपको बधाई देता है? नही न

क्या कोई भी ईसाई किसी भी मंदिर में जाता है? कभी नहीं जाता, न ही वो ईसाइयों के सिवाय किसी भी त्यौहार को मनाता है

लेकिन जैन बिना तरी का लोटा है वो नवरात्र, new year, दशहरा आदि त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाता है
क्या उनकी दुकान या घर आदि में कोई जैन भगवान पूजे जाते हैं ? नही न

लेकिन जैन महा ढीठ हो गया है
वो new year की तैयारी कर रहा है

अरे जैनो का नव वर्ष दीपावली पर होता है कार्तिक कृष्ण अमावस्या इसिलए हम वीर यानि महावीर निर्वाण संवत लिखते हैं

क्योकि महावीर भगवान का शासन चल रहा है और वो अंतिम तीर्थंकर है उनके बाद अब कोई भी तीर्थंकर हमे नही मिलेंगे

तो महावीर प्रभु के अंतिम क्षण को याद रखने के लिए दीपावली यानि महावीर प्रभु का निर्वाण दिवस नववर्ष के रूप में मनाते हैं यानि वीर निर्वाण संवत मानते हैं

जिन लोगों को लगता है कि जैनो का नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा(एकम) यानि गुड़ी पड़वा को होती है तो वो लोग भी ध्यान से पढ़े

*चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को विक्रम संवत शुरू होती है और इस वर्ष 2016 में विक्रम संवत 2073 चल रही हैं*

*जबकि वीर निर्वाण संवत 2542 चल रही हैं*

इस हिसाब से *हमारा जैन पंचांग विक्रम संवत से लगभग 475 वर्ष पहले का है और शायद दुनिया का सबसे पुराना इससे पुरानी संवत कोई भी नही चल रही है*

अब आप कहेंगे कि मुनिराज भी तो ईसाई नववर्ष पर आयोजन करते हैं

तो उसका कारण यह है कि
हम जैसे बिना तरी के लोटे है

नव वर्ष पर कही वहक न जाये
मतलब
आप पार्टी में जाओगे, वहाँ दारू, अंडे वाला केक, nonvej आदि का सेवन कर सकते हैं , अपने ब्रह्मचर्य पर दाग लगाकर जिन धर्म की प्रभावना और जैन जाति को कलंकित कर सकते हैं और कुछ बेबकूफ जैन ऐसा करते भी है

इन सभी कुकृत्यों से बचाने के लिए मज़बूरी में जैन संतो को भी 1 jan पर आयोजन करने पड़ते हैं जिस से कोई भटक न जाये

ईसाई आदि लोगो के लिए कोई महावीर जयंती आदि का आयोजन नही होता है क्योंकि वो हमारी तरह बिना तरी के लोटे नही है
मैं यहाँ किसी भी अन्य धर्म का विरोध नही करता हूँ बस जैनो को आइना दिखा रहा हूँ

चलो हम सब तो बनिया है न जब कोई हमे 4 rs देता है तब हम उसे 3 rs देते है लेकिन यहाँ सब उल्टा है

यदि अन्य धर्म के ज्यादातर लोग जैन त्यौहार मनाने लगे तो आप भी उनके त्योहारो में शामिल हो जाना लेकिन क्या ऐसा है?

शर्म आनी चाहिए हम सभी को यदि हम भी ईसाइयों की तरह अपने भगवान पर ही विश्वास रखते
और जैन त्यौहार ही मनाते,

*अपने शराब,रात्रिभोजन ,मांस,अंडे के सेवन का त्याग दृढ़ता पूर्वक पालन करते,*
*अपने काम वासना को नियंत्रित रखते, पत्नी /पति के अलावा किसी और से नाज़ायज़ संबध नही रखते* तो

शायद आज *हमारे महान सन्तो को न चाहते हुए भी ये काम नही करना पड़ता*

*तो कौन हैं ऐसा जैन जो 1 jan को गुरुओं या जिनप्रतिमा और शास्त्रके सामने नियम ले कि मैं कभी भी शराब, रात्रिभोजन,अंडा,मांस, आदि का सेवन नही करूँगा और अपने जीवन में किसी भी स्त्री पुरुष से नाजायज़ संबध कभी नही रखूँगा, जिनेन्द्र देव-जिन शास्त्र-जिन गुरु और माता पिता के अलावा किसी और को नमस्कार नही करूँगा, चाहे प्राण क्यूँ न चले जाये,*

तो हमारे संतो की मेहनत सफल हो पायेगी वरना हम बिना तरी के लोटे तो है ही

*कड़वा है लेकिन सच है*

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