जूते की अभिलाषा

पढ़िए पैरोडी

शीर्षक – #जूते_की_अभिलाषा

★★★★
चाह नहीं, चरनन देवों की,
बन, चरण-पादुका तर जाऊँ।
विश्व-सुंदरी के गहनों में,
मैं सजूँ, भाग्य फिर इतराऊँ।।
★★★★
चाह नहि जनता को लूटने,
सत्ता, गद्दी पर चढ़ जाऊँ।
चाह नहि नेताओं संग मैं,
घोटाला कोई कर जाऊँ।।
★★★★
नहीं सोच है बनूँ धरम मैं,
धोखा बन सब मन भर जाऊँ।
या अपनों का तोड़ भरोसा,
फिर, खंड-खंडकर बंट जाऊँ।।
★★★★
नहीं राजा का महल सुहाय।
कुटिया अब मन को नहीं भाय।
बहुत चला कंटक कष्टों में,
राह गलत अब चली नहि जाय।।
★★★★
नहि मैं कोई रुतबा चाहूँ,
नहीं चाहूँ कोई सरकार।
मैं जूता मेरी अभिलाषा,
मैं चाहूँ बस एक उपकार।।
★★★★
मुझे बना लेना तू #मोची,
उन सब सरों पर देना मार।
मातृभूमि पर लूट करें जो,
और दीनों पर अत्याचार।।
★★★★

संतोष बरमैया #जय

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 50

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share