कविता · Reading time: 1 minute

— जूझना पड़ता है —

घोड़े की तस्वीर , या
उगते सूरज की तस्वीर लगा लेने से
प्रगति नही हुआ करती है !!

इस के लिए भी जूझना पड़ता है
रात दिन एक करना पड़ता है
दुनिया में उलझना भी पड़ता है
मेहनत का रंग भरना पड़ता है !!

वो प्रेरणादायक हैं हम को
कर्म के लिए कर्मठ बनाने के लिए
सोते हुए इंसान को जगाने के लिए
मन बोझिल है तो हसाने के लिए
बिना रुके आगे जाने के लिए !!

मनोबल गिरने लगे तो उठाने के लिए
जग में कुछ कर जाने के लिए
जिम्मेदारिओं को निभाने के लिए
हर वो मंजिल पाने के लिए
हम को सुबह सवेरे जागना पड़ता है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , Books: तीन कविता साहित्यापेडिया में प्रकाशित हुई है..यही मेरा सौभाग्य रहा है…
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