कविता · Reading time: 1 minute

जुवाँ पर बात दिल की न आने देता

जुवाँ पर बात दिल की मैं , कभी आने नहीं देता
किसी भी बेवफा पर दिल , कभी जाने नहीं देता

किया बर्बाद अपने को , मुहब्बत में सदा उसने
नजर अपनी किसी पर भी , कही लाने नहीं देता

दिये है जख्म ढेरो अब , जमाने ने न जाने क्यों
हुआ मेरा दुखी दिल जब , मगर ताने नहीं देता

नजर उस चाँद की अब क्यों, लगा करती तुझे ऐसी
तुझे हर रोज काजल मैं , लगा पाने नहीं देता

हमेशा राजरानी हो , हँसीँ दिल में रहा करिए
तभी तो मायके में पैर टिकवाने नहीं देता

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