मुक्तक · Reading time: 1 minute

जुदा

एक ही शाख पर है फूल और कांटे
दोनों की फितरत है जुदा

एक ही दरिया के हैं दोनों किनारे
दोनों की किस्मत है जुदा

एक ही फलक पे है चांद और सूरज
दोनों की शोहरत है जुदा

एक ही सिक्के के हैं दोनों पहलू
दोनों की सूरत है जुदा

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