.
Skip to content

जुगाड़

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

लघु कथा

November 9, 2017

सुबह से ही दीप्ति रोये जा रही हैं उसे स्कूल से प्रोजेक्ट बनाने दिया गया है पर माँ इन रोज-रोज के प्रोजेक्ट से परेशान जब से पति दुनिया छोड़कर गये हैं इन दो बच्चों के खाना और कपड़े का जुगाड़ कर पाना ही मुश्किल है। लोगों के घरो में सफाई का काम करके ही घर का गुजारा चलता है। दोनों बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला तो करा दिया। किसी तरह से काॅपी किताब का भी इंतजाम कर दी पर स्कूल के रोज रोज के प्रोजेक्ट के लिए पैसे कहाँ से लाती।अतः पैसे देने से मना कर दी, पर दीप्ति कहाँ मानने वाली, उसे चाहिए तो बस चाहिए। उसका भाई उसे चुप करा रहा है। पर दीप्ति चूप ही नहीं हो रही हैं जिद्द पर अड़ी है। दीपक बोला चुप हो जा मैं कुछ इन्तजाम करता हूँ। तभी उसका ध्यान घर के सामने कूड़े के ढेर में गया। वह उस ढेर से कुछ ढूंढने लगा। उसमें से कुछ खाली माचिस की डिब्बे, कुछ कपड़े के कतरन, टूटे प्लेट, ग्लास, बटन, सीडी आदि इकट्ठा करने लगा। दीप्ति बोली भैया यह क्या कर रहे हों। भला कूड़े से क्या बना सकते हैं। वह बोला बस देखती जा। देखते ही देखते दीपक ने उन सभी समानों से एक बड़ा सा गुड़िया बना डाला जिसने हाथों में एक तितली पकड़ रखी थी। अगले दिन, वह वो प्रोजेक्ट स्कूल में ले गई। वहां सभी बच्चों का प्रोजेक्ट आर्टिफिशल समानों से बना हुआ था। उसे अपना प्रोजेक्ट कूड़े से बना देख शर्म आने लगी। आर्ट के पीरियड में सभी अपना प्रोजेक्ट सबमिट करने लगे। वह सहमी सी अपना प्रोजेक्ट देने गई। तभी सर उसके लिए ताली बजाने लगे। सर को देख सभी बच्चे भी ताली बजाने लगे। पूरी कक्षा ताली से गूँज ऊठी।सर ने कहा कि उसका प्रोजेक्ट सबसे खास और सबसे सुंदर है। आख़िरकार उसके भैया का जुगाड़ सफल हुआ।
???? -लक्ष्मी सिंह ?☺

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
Recommended Posts
,?  मेरा  प्यारा  स्कूल    ?
*?मेरा प्यारा स्कूल?* प्यारा सा स्कूल,, सुधारे सब भूल,, सीखे लिखना पढ़ना,, अपना जीवन गढ़ना,, क्यारी में खिले फूल,, नन्हे मुन्ने बच्चों के संग,, खिल... Read more
हमें
*"स्कूल चले हम"* *पढ़ेगा जो बढ़ेगा वो*, सभी को ही बताना है। हमें "स्कूल जाना है, *हमें "स्कूल जाना है* ।। हमारे हाथ में अपनी,... Read more
हमें
*स्कूल चले हम* *पढ़ेगा जो बढ़ेगा वो*, सभी को ही बताना है। हमें "स्कूल जाना है, *हमें "स्कूल जाना है* ।। हमारे हाथ में अपनी,... Read more
समझौता
लड़की, बीड़ी की टोकरी लिए जाती है, कारख़ाने रोज़-ब-रोज़ । ठेकेदार घूरता है उसे श्वान की तरह, ताकता है, उसकी देहयष्टि । जैसे कि- लड़की... Read more