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जी लेती है जी भरकर के…मुस्कुराती सी

Dinesh Sharma

Dinesh Sharma

कविता

August 13, 2016

सुबह की मस्त सुहानी हवा से
झूमते पत्तो फूलो की डाली
सूरज की पहली किरण
इठलाती सी ओस की बुँदे को
स्पर्श कर जो नाच रही
चमक रही मोती सी गुलाब की
पंखुड़ी पर पल पल जी रही
बेपरवाह हो कर वो,
एक झोंके से पल की जिंदगी मेरी मिल जायेगी
नम मिट्टी पर ये जानते हुए,
मोती सी वो नाच रही ओस की बूँद
सूरज की पहली किरण के साथ
मुस्कुराती सी पल पल,
जीने का राज जान लिया मैंने भी
उस ओस की चमकती बूँद से
जो पल भर के जिंदगी को जी लेती है,
जी भर के सूरज की पहली किरण के साथ
मुस्कुराती सी?☺?

^^^^दिनेश शर्मा^^^^

Author
Dinesh Sharma
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।
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