Aug 13, 2016 · कविता

जी लेती है जी भरकर के...मुस्कुराती सी

सुबह की मस्त सुहानी हवा से
झूमते पत्तो फूलो की डाली
सूरज की पहली किरण
इठलाती सी ओस की बुँदे को
स्पर्श कर जो नाच रही
चमक रही मोती सी गुलाब की
पंखुड़ी पर पल पल जी रही
बेपरवाह हो कर वो,
एक झोंके से पल की जिंदगी मेरी मिल जायेगी
नम मिट्टी पर ये जानते हुए,
मोती सी वो नाच रही ओस की बूँद
सूरज की पहली किरण के साथ
मुस्कुराती सी पल पल,
जीने का राज जान लिया मैंने भी
उस ओस की चमकती बूँद से
जो पल भर के जिंदगी को जी लेती है,
जी भर के सूरज की पहली किरण के साथ
मुस्कुराती सी?☺?

^^^^दिनेश शर्मा^^^^

65 Views
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज...
You may also like: