गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

जी रहा हूँ जिंदगी गुमनाम की

दिल लगी ये दिल लगी बस नाम की||
जी रहा हूँ जिंदगी गुमनाम की||1||

ख्वाब आते जाते रहते पर प्रभू|
जप रहा माला मै तेरे नाम की||2||

दर्श देना जब मिले मौका प्रभू|
देखनी है-२ कैसी सूरत राम की||3||

💬
उफ ‘धुरंधर’ आज तो भक्ति मे है|
क्या अभी उतरी नहीं है शाम की||1||

~जनार्दन पाठक ‘धुरंधर’

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