कविता · Reading time: 1 minute

जीवन

हार हो या जीत यह प्रश्न नही गम्भीर।
तू बस प्रयत्न कर ना हो तू अधीर।।
जीवन संघर्षो का मार्ग है,
हर कदम पर द्वंद है ।
लाख मुश्किले सही फिर भी
जीवन प्रेम का एक छन्द है ।।
निश्चल और निर्भीक बन,
क्यो अवसाद में है यह मन ,
तू बस सहज रह फिर देख
विजय कितनी करीब है ।।
विपदाओं के अन्धड है,
और कुचक्र के घेरे है,
जो लोग है अवरोधक
वो ना तेरे ह ना मेरे है ।
सत्य का पथ बाधाओ से युक्त है,
हर स्वाँस उन्मुक्त है ,
तू राही ह उस पथ का,
जिसमे कन्टक भी है और सुमन भी,
हा पाँव तेरे लहलूहान है,
लेकिन रुक थोड़ा इन्तज़ार कर
तेरे कदमो मे जहाँ ही जहाँ है ।।

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