जीवन

फूल खिले कलियाँ हँसी, चिड़ियाँ गायें गान
दस्तक देती भोर है, उठ जा तू इंसान

आये सजकर भास्कर,पहन किरण का ताज
नभ में छाई लालिमा, दिन का है आगाज़

जग में रख तू बस खुली, अपनी आंखें कान
खुद ही खुद को ले परख, भला बुरा पहचान

वक़्त बड़ा अनमोल है,करना सदउपयोग
पर मानव चलना सँभल, हैं सुख दुख के योग

छलती ये साँसे रहें, रहकर सबके साथ
जन्म मृत्यु कुछ भी नहीं, यहाँ हमारे हाथ

जीवन मे घुलते रहें, तरह तरह के रंग
इन सँग जीना सीख ले, यही बड़ा सत्संग

03-12-2018
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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