Jul 29, 2017 · कविता
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जीवन हैं एक मेला

जीवन है एक मेला,
उलझनाे का है झमेला,
लगे है खुशियों के झूले,
भटककर हम उनकाे भूले,
पग पग पर लगे है कुंए माैत के,
अच्छी साेच, सच्ची चाह संग है दाेस्त के,
जीवन में भर लाे अपनाे के रंग,
हर पल लगेगा सुहाना उनके संग,
जीना है चलकर,
मुड़ना नही डरकर,
।।जेपीएल।।।

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जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना... View full profile
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