*जीवन सार*

शैशव काल
अनजान अज्ञान
बाल्यकाल
शिक्षा में लगा ध्यान
किशोरावस्था
समझे अपनी शान
वयस्कता
ना रहे कोई भान
शनै शनै
उतरा तूफान
वृद्धावस्था
करती परेशान
मुट्ठी में आई अब जान
बेटा ना बेटी रखते मान
ऐसे में याद आया भगवान
सभी तो ऐसे हैं इंसान
बचपन में सब ने उठाया
बुढ़ापे में अपनों ने ठुकराया
इंसान समझ ना पाया
माया मोह में भरमाया
हाथ तनिक भी
कुछ ना आया
– राजेश व्यास “अनुनय”

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